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हकीम ने जोर देकर कहा कि अगर किसी पिछड़े वर्ग को शिक्षा या आर्थिक मदद दी जा रही है, तो उसे तुष्टिकरण कहना संवैधानिक मूल्यों का अपमान है
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में पहचान और सांप्रदायिकता के मुद्दों पर जारी बहस के बीच कोलकाता के मेयर और वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हकीम ने एक बेहद आक्रामक और स्पष्ट रुख अपनाया है। राज्य की सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए हकीम ने साफ तौर पर कहा कि बंगाल की धरती पर नफरत की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है और यह राज्य कभी भी गुजरात या उत्तर प्रदेश के रास्ते पर नहीं चलेगा। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में हर धर्म और वर्ग के लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं, क्योंकि यहाँ डर की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की राजनीति होती है।
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशों पर निशाना साधते हुए फिरहाद हकीम ने असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति का भी संदर्भ दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल का समाज एक मजबूत धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर आधारित है, जहाँ बाहरी विचारधाराओं या सांप्रदायिक आधार पर वोटों के बंटवारे की राजनीति सफल नहीं होगी।
मेयर ने कहा कि बंगाल के लोग विकास और सद्भाव को प्राथमिकता देते हैं, न कि विभाजनकारी एजेंडे को। उनके अनुसार, तृणमूल का सर्वधर्म समभाव का मॉडल ही राज्य की असली ताकत है। विपक्ष द्वारा अक्सर लगाए जाने वाले मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों पर भी मेयर ने जमकर पलटवार किया। उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार किसी खास समुदाय को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि भारत के संविधान के दायरे में रहकर काम कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य समाज के पिछड़े, वंचित और अल्पसंख्यक वर्गों को मुख्यधारा में लाना और उन्हें सशक्त बनाना है।
हकीम ने जोर देकर कहा कि अगर किसी पिछड़े वर्ग को शिक्षा या आर्थिक मदद दी जा रही है, तो उसे तुष्टिकरण कहना संवैधानिक मूल्यों का अपमान है।
मेयर ने उत्तर प्रदेश और गुजरात के राजनीतिक मॉडलों की आलोचना करते हुए कहा कि बंगाल की संस्कृति गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और काजी नजरुल इस्लाम की साझा विरासत से प्रेरित है। यहाँ की राजनीति में समावेशिता है, न कि किसी एक वर्ग को निशाना बनाना। उन्होंने राज्य के प्रशासनिक कामकाज का बचाव करते हुए कहा कि तृणमूल सरकार ने हर क्षेत्र में विकास सुनिश्चित किया है और यही कारण है कि जनता का भरोसा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कायम है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले फिरहाद हाकिम का यह बयान अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट रखने और भाजपा के 'हिंदुत्व' कार्ड का मुकाबला करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। हाकिम ने अपने इस बयान से यह संदेश देने की कोशिश की है कि तृणमूल कांग्रेस ही बंगाल की धर्मनिरपेक्ष पहचान की एकमात्र रक्षक है।